Adhyāya 283: Varṇa-vṛtti, Nyāya-ārjana, and the Decline-and-Restoration of Dharma (वर्णवृत्तिः न्यायार्जनं च)
षड् रसान् निवहन्त्येता गुडकुल्या मनोरमा: । उच्चावचानि मांसानि भक्ष्याणि विविधानि च,ये सब नदियाँ षट्रस भोजन प्रवाहित कर रही थीं। गुड़के रसकी छोटी-छोटी मनोरम नहरें दृष्टिगोचर होती थीं। नाना प्रकारके फलोंके गूदे और भाँति-भाँतिके भक्ष्य-पदार्थ प्रस्तुत किये गये थे
ແມ່ນ້ໍາເຫຼົ່ານັ້ນພາພາລົດຊາດຫົກປະການຂອງອາຫານໄຫຼມາ. ຍັງມີຄອງນ້ໍານ້ອຍໆອັນງາມຕາ ທີ່ເຕັມໄປດ້ວຍນ້ໍາຕານອ້ອຍ (guḍa). ແລະມີເນື້ອສັດຫຼາຍຊະນິດ ກັບຂອງກິນຫຼາຍຢ່າງ ຖືກຈັດວາງໄວ້.
दक्ष उवाच