अध्याय २८१ — दानधर्मः, न्यायागतधनम्, ऋणत्रय-परिशोधनं च
Dāna ethics, lawful wealth, and settling obligations
भीष्मजी कहते हैं--राजन! महात्मा ब्रह्माजीके ऐसा कहनेपर वृक्ष, ओषधि और तृणका समुदाय उनकी पूजा करके जैसे आया था, वैसे ही शीघ्र लौट गया ।। आहूयाप्सरसो देवस्ततो लोकपितामह: । वाचा मधुरया प्राह सान्त्वयन्निव भारत,भारत! तत्पश्चात् लोकपितामह ब्रह्माजीने अप्सराओंको बुलाकर उन्हें मीठे वचनोंद्वारा सान्त्वना देते हुए-से कहा--
āhūyāpsaraso devas tato lokapitāmahaḥ | vācā madhurayā prāha sāntvayann iva bhārata ||
ພີດສະມະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະຣາຊາ! ເມື່ອມະຫາອາດຕະມາ ພຣະພຣະຫມາ ກ່າວດັ່ງນັ້ນແລ້ວ ບັນດາຕົ້ນໄມ້ ພືດຢາ ແລະ ຫຍ້າ ກໍບູຊາພຣະອົງ ແລະ ຮີບຮ້ອນກັບຄືນໄປດັ່ງເກົ່າ. ຕໍ່ມາ ພຣະປິຕາມະຫາແຫ່ງໂລກ ພຣະພຣະຫມາ ໄດ້ເອີ້ນອັບສະຣາມາ ແລະ ກ່າວດ້ວຍວາຈາອັນຫວານ ດັ່ງກຳລັງປອບໂຍນພວກນາງວ່າ—
भीष्म उवाच