मोक्षधर्मः — स्नेहपाशच्छेदः
Mokṣa-dharma: Cutting the Bonds of Attachment
न चक्षुषा न मनसा न वाचा दूषयेदपि । न प्रत्यक्ष परोक्षं वा दूषणं व्याहरेत् क्वचित्,न नेत्रसे, न मनसे और न वाणीसे ही वह दूसरेके दोष देखे, सोचे या कहे। किसीके सामने या परोक्षमें पराये दोषकी चर्चा कहीं न करे
na cakṣuṣā na manasā na vācā dūṣayed api | na pratyakṣa-parokṣaṃ vā dūṣaṇaṃ vyāharet kvacit ||
ພີດສະມະກ່າວວ່າ: «ຢ່າເຫັນຜິດຂອງຜູ້ອື່ນ ດ້ວຍຕາ, ດ້ວຍໃຈ, ຫຼື ດ້ວຍວາຈາ. ຢ່າເວົ້າຕິຕຽນເລີຍ ບໍ່ວ່າຕໍ່ໜ້າ ຫຼື ລັບຫຼັງ»។
भीष्म उवाच