इन्द्रेण वृत्रवधः, ब्रह्महत्याया अनुगमनम्, तथा च विभाजन-निवासविधानम्
Indra’s defeat of Vṛtra; pursuit by Brahmahatyā; allocation of her abodes
एतैरविंवर्धते तेज: पाप्मानमुपहन्ति च । सिध्यन्ति चास्य संकल्पा विज्ञानं च प्रवर्तते,ध्यान, अध्ययन, दान, सत्य, लज्जा, सरलता, क्षमा, बाहर-भीतरकी पवित्रता, आहारशुद्धि और इन्द्रियोंका संयम--ये ही योगके साधन हैं। इन सबके द्वारा साधकका तेज बढ़ता है। वह अपने पापोंका नाश कर डालता है। उसके संकल्प सिद्ध होने लगते हैं और हृदयमें विज्ञानका आविर्भाव हो जाता है
etair abhivardhate tejaḥ pāpmānam upahanti ca | sidhyanti cāsya saṅkalpā vijñānaṃ ca pravartate ||
ພີດສະມະກ່າວວ່າ: «ໂດຍສາທະນະເຫຼົ່ານີ້ ລັດສະໝີພາຍໃນແລະກຳລັງທາງວິນຍານຈະເພີ່ມພູນ ແລະ ບາບຈະຖືກທຳລາຍ. ຄວາມຕັ້ງໃຈຂອງຜູ້ສະແຫວງຫາເລີ່ມໃຫ້ຜົນ ແລະ ວິຊານະ (vijñāna) ກໍເກີດຂຶ້ນ ແລະ ກ້າວໜ້າໃນດວງໃຈ».
भीष्म उवाच