यज्ञेऽहिंसा-प्राधान्यम्
Primacy of Non-Harm in Sacrificial Ethics
छिन्नस्थूणं वृषं दृष्टवा विलापं च गवां भृशम् | गोग्रहे यज्ञवाटस्थ प्रेक्षमाण: स पार्थिव:,एक समय किसी यज्ञशालामें राजाने देखा कि एक बैलकी गरदन कटी हुई है और वहाँ बहुत-सी गौएँ आर्तनाद कर रही हैं। यज्ञशालाके प्रांगणमें कितनी ही गौएँ खड़ी हैं। यह सब देखकर राजा बोले--
ຄັ້ງໜຶ່ງ ໃນລານພິທີຍັດ ກະສັດໄດ້ເຫັນງົວຜູ້ຕົວໜຶ່ງຖືກຕັດຄໍ ແລະຝູງງົວກໍຮ້ອງໄຫ້ຄຳຄວນຢ່າງໜັກ. ໃນລານພິທີນັ້ນມີງົວຫຼາຍຕົວຢືນຢູ່. ເຫັນທັງໝົດນີ້ແລ້ວ ກະສັດຈຶ່ງກ່າວວ່າ—
भीष्म उवाच