कामबन्धन-निवृत्ति तथा शान्तिलक्षण-उपदेशः | Release from Desire-Bondage and the Marks of Peace
एतैर्जितस्तु जयति सर्वाल्लॉकान् न संशय: । आचार्यो ब्रद्मलोकेश: प्राजापत्ये पिता प्रभु:,इनसे हार मानकर रहनेवाला मनुष्य सम्पूर्ण लोकोंपर विजय पाता है, इसमें संशय नहीं है। आचार्य ब्रह्मलोकका स्वामी है, पिता प्रजापतिलोकका ईश्वर है, अतिथि इन्द्रलोकके और ऋत्विज देवलोकके स्वामी हैं। कुटुम्बकी स्त्रियाँ अप्सराओंके लोककी स्वामिनी हैं और जाति-भाई विश्वेदेव लोकके अधिकारी हैं
etair jitastu jayati sarvāl lokān na saṁśayaḥ | ācāryo brahmalokeśaḥ prājāpatye pitā prabhuḥ |
ວະຍາສະກ່າວວ່າ: ຜູ້ໃດທີ່ “ຍອມແພ້” ຕໍ່ຄົນເຫຼົ່ານີ້—ໝາຍເຖິງ ຍອມອ່ອນນ້ອມ ແລະເຄົາລົບ—ຜູ້ນັ້ນຍ່ອມຊະນະໂລກທັງປວງ ບໍ່ມີຂໍ້ສົງໄສ. ອາຈານເປັນເຈົ້າໃນໂລກຂອງພຣະພຣະຫມາ; ພໍ່ເປັນອະທິປະໄຕໃນໂລກຂອງປຣະຈາປະຕິ.
व्यास उवाच