Gṛhastha-vṛtti and Niyama: Models of Householder Livelihood and Discipline (गृहस्थवृत्ति-नियमाः)
तिष्ठत्ये तेषु भगवान् षट्सु कर्मसु संस्थित: । व्यासजी कहते हैं--बेटा! ब्राह्मणको चाहिये कि वेदोंमें बतायी गयी त्रयी विद्या--“अ उ म्' इन तीन अक्षरोंसे सम्बन्ध रखनेवाली प्रणवविद्याका चिन्तन एवं विचार करे। वेदके छहों अंगोंसहित ऋक्, साम, यजुष् एवं अथर्वके मन्त्रोंका स्वर-व्यंजनके सहित अध्ययन करे; क्योंकि यजन-याजन, अध्ययन-अध्यापन, दान और प्रतिग्रह--इन छ: कर्मामें विराजमान भगवान् धर्म ही इन वेदोंमें प्रतिष्ठित हैं,धर्मद्वीपेन भूतानां चार्थकामजलेन च । ऋतवाड्मोक्षतीरेण विहिंसातरुवाहिना कालरूपी महान् नद बह रहा है। इसमें वर्षरूपी भँवरें सदा उठ रही हैं। महीने इसकी उत्ताल तरंगें हैं। ऋतु वेग हैं। पक्ष लता और तृण हैं। निमेष और उन्मेष फेन हैं। दिन और रात जल-प्रवाह हैं। कामदेव भयंकर ग्राह है। वेद और यज्ञ नौका हैं। धर्म प्राणियोंका आश्रयभूत द्वीप है। अर्थ और काम जल हैं। सत्यभाषण और मोक्ष दोनों किनारे हैं। हिंसारूपी वृक्ष उस कालरूपी प्रवाहमें बह रहे हैं। युग हद है तथा ब्रह्म ही उस कालनदको उत्पन्न करनेवाला पर्वत है। उसी प्रवाहमें पड़कर विधाताके रचे हुए समस्त प्राणी यमलोककी ओर खिंचे चले जा रहे हैं
tiṣṭhaty ete teṣu bhagavān ṣaṭsu karmasu saṁsthitaḥ | dharmadvīpena bhūtānāṁ cārthakāmajalenaca | ṛtavāḍmokṣatīreṇa vihiṁsātaruvāhinā |
ວະຍາສະ ກ່າວວ່າ: «ພຣະຜູ້ເປັນເຈົ້າ—ຄືທັມມະເອງ—ສະຖິດຢູ່ຢ່າງໝັ້ນຄົງໃນໜ້າທີ່ທັງຫົກນີ້. ດັ່ງນັ້ນ ພຣາຫມັນຄວນພິຈາລະນາພຣະປຣະນະວະ (A-U-M) ແລະສຶກສາມັນຕຣາຂອງ ຣິກ, ສາມ, ຢະຈຸສ, ແລະ ອະຖະວະ ພ້ອມທັງອົງປະກອບຊ່ວຍຂອງພຣະເວດທັງຫົກ ໂດຍຮັກສາສຽງແລະອັກສອນໃຫ້ຖືກຕ້ອງ. ເພາະພຣະອົງໃນຮູບທັມມະ ຕັ້ງຢູ່ໝັ້ນໃນວິໄນແຫ່ງພຣະເວດເຫຼົ່ານີ້ ແລະໃນກິດທັງຫົກ: ບູຊາຍັດ, ບູຊາໃຫ້ຜູ້ອື່ນ, ຮຽນ, ສອນ, ໃຫ້ທານ, ແລະຮັບທານ»។ ແລ້ວທ່ານກໍພັນລະນາເວລາເປັນແມ່ນ້ໍາໃຫຍ່ທີ່ພາສັດທັງປວງໄປຂ້າງໜ້າ: ທັມມະເປັນເກາະພັກພິງທ່າມກາງນ້ໍາແຫ່ງອັດຖະແລະກາມະ; ຄໍາຈິງແລະໂມກຂະເປັນຝັ່ງສອງຂ້າງ; ແລະຕົ້ນໄມ້ແຫ່ງຄວາມຮຸນແຮງລອຍໄປຕາມກະແສນັ້ນ ໃນຂະນະທີ່ສັດທັງຫຼາຍທີ່ຜູ້ຈັດສັນສ້າງໄວ້ ຖືກດຶງໄປສູ່ອານາຈັກຂອງຍະມະ.
व्यास उवाच