योग–सांख्यसमन्वयः, रथोपमा, व्यक्त–अव्यक्तविवेकः
Yoga–Sāṃkhya Synthesis, Chariot Allegory, and the Vyakta–Avyakta Distinction
अहं लक्ष्मीरहं भूति: श्रीक्षाहं बलसूदन । अहं श्रद्धा च मेधा च संनतिर्विजिति: स्थिति:,बलसूदन! मैं ही लक्ष्मी हूँ। मैं ही भूति हूँ और मैं ही श्री हूँ। मैं श्रद्धा, मेधा, संनति, विजिति, स्थिति, धृति, सिद्धि, कान्ति, समृद्धि, स्वाहा, स्वधा, संस्तुति, नियति और स्मृति हूँ
«ໂອ ບະລະສູດະນ, ເຮົາແມ່ນ ລັກສະມີ; ເຮົາແມ່ນ ພູຕິ; ເຮົາແມ່ນ ສຣີ. ເຮົາແມ່ນ ສັດທາ ແລະ ເມທາ; ເຮົາແມ່ນ ສັນນະຕິ, ວິຊິຕິ, ແລະ ສະຖິຕິ».
शक्र उवाच