अध्याय २०८ — इन्द्रियनिग्रहः, सत्याहिंसात्मकवाक्, कर्मफलविवेकः
Restraint of the Senses, Non-harming Truthful Speech, and Discernment of Karmic Consequence
उन्मुचो विमुचश्चैव स्वस्त्यात्रेयश्व वीर्यवान्,एते ब्रह्मर्षयो नित्यमास्थिता दक्षिणां दिशम् उन्मुच, विमुच, बलवान स्वस्त्यात्रेय, प्रमुच, इध्मवाह, दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रतका पालन करनेवाले मित्रावरुणके प्रतापी पुत्र भगवान् अगस्त्य--ये ब्रह्मर्षि सदा दक्षिण दिशामें रहते हैं
unmuco vimucaś caiva svastyātreyaś ca vīryavān | ete brahmarṣayo nityam āsthitā dakṣiṇāṃ diśam ||
ພີສະມະ ກ່າວວ່າ: «ອຸນມຸຈ, ວິມຸຈ ແລະ ສະວັສຕີອາເຕຣຍ ຜູ້ກ້າຫານ—ບຣະຫມະິສິເຫຼົ່ານີ້ ພຳນັກຢູ່ເປັນນິດໃນທິດໃຕ້».
भीष्म उवाच