Kārttikeya-Abhiṣecana: Mātṛgaṇa-Nāma Saṃkīrtana and Skanda’s Commission
स हि देवासुरे युद्धे दैत्यानां भीमकर्मणाम् । जघान दोर्भ्या संक्रुद्धः प्रयुतानि चतुर्दश,रुद्रर्वसुभिरादित्यैरश्विभ्यां च वृतः प्रभु: । महापराक्रमी इन्द्र और विष्णु, सूर्य और चन्द्रमा, धाता और विधाता, वायु और अग्नि, पूषा, भग, अर्यमा, अंश, विवस्वान्ू, मित्र और वरुणके साथ बुद्धिमान् रुद्रदेव, एकादश रुद्रणण, आठ वसु, बारह आदित्य और दोनों अश्विनीकुमार--ये सब-के-सब प्रभावशाली कुमार कार्तिकेयको घेरकर खड़े हुए उसने देवासुरसंग्राममें अत्यन्त कुपित होकर भयानक कर्म करनेवाले चौदह प्रयुत- दैत्योंका केवल अपनी दोनों भुजाओंसे वध कर डाला था
sa hi devāsure yuddhe daityānāṁ bhīmakarmaṇām | jaghāna dorbhyāṁ saṁkruddhaḥ prayutāni caturdaśa ||
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນສົງຄາມລະຫວ່າງເທວະແລະອະສຸຣະ, ຜູ້ມີລິດນັ້ນ—ເມື່ອໂກດກຽວ—ໄດ້ສັງຫານດາຍຕະຍະ ນັກຮົບຜູ້ກະທຳການນ່າຢ້ານ ຈຳນວນສິບສີ່ “ປະຍຸຕ” ດ້ວຍແຂນສອງຂ້າງຂອງຕົນເທົ່ານັ້ນ. ຂໍ້ຄວາມນີ້ຍົກແບບຢ່າງຂອງຄວາມກ້າຫານອັນທ້ວມທົ່ວທີ່ໃຊ້ເພື່ອປົກປ້ອງລະບຽບໂລກ: ເມື່ອພະລັງທຳລາຍຄຸກຄາມດຸນຍະພາບທີ່ເທວະຮັກສາ, ອຳນາດອັນຊອບທຳຖືກພັນລະນາວ່າ ວ່ອງໄວ, ຕັດສິນແນ່ນອນ, ແລະສົມສ່ວນກັບອັນຕະລາຍ.
वैशम्पायन उवाच