शल्यपरिघातः (Śalya Under Encirclement) — Mahābhārata, Śalya-parva, Adhyāya 12
०: >> अर द्ादशो<ड् ध्याय: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुनः युधिषिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध संजय उवाच पतितं प्रेक्ष्य यन्तारं शल्य: सर्वायसीं गदाम् | आदाय तरसा राजंस्तस्थौ गिरिरिवाचल:,संजय कहते हैं--राजन्! अपने सारथिको गिरा हुआ देख मद्रराज शल्य वेगपूर्वक लोहेकी गदा हाथमें लेकर पर्वतके समान अविचलभावसे खड़े हो गये
sañjaya uvāca | patitaṃ prekṣya yantāraṃ śalyaḥ sarvāyasīṃ gadām | ādāya tarasā rājan tasthau girir ivācalaḥ ||
ສັນຊະຍະກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະຣາຊາ, ເມື່ອເຫັນສາລະທີຂອງຕົນລົ້ມລົງ ຊາລະຍະ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມັດຣະ ກໍຮີບຄວ້າຄະດາເຫຼັກລ້ວນຂຶ້ນມາ ແລະຢືນໝັ້ນບໍ່ຫວັ່ນໄຫວ ດັ່ງພູເຂົາ—ແນ່ວແນ່ຢູ່ກາງກົດແຫ່ງສົງຄາມ.
संजय उवाच