Sauptika Parva, Adhyaya 8 — Dhṛṣṭadyumna-vadha and the Camp’s Nocturnal Rout
जबसे कौरव-पाण्डव सेनाओंका संग्राम आरम्भ हुआ था, तभीसे वे योद्धा कन्यारूपिणी कालरात्रिको और कालरूपधारी अभश्व॒त्थामाको भी देखा करते थे। पहलेसे ही दैवके मारे हुए उन वीरोंका द्रोणपुत्र अश्वत्थामाने पीछे वध किया था। वह अभश्वत्थामा भयानक स्वरसे गर्जना करके समस्त प्राणियोंको भयभीत कर रहा था ।। तदनुस्मृत्य ते वीरा दर्शन पूर्वकालिकम् । इदं तदित्यमन्यन्त दैवेनोपनिपीडिता:,वे दैवपीडित वीरगण पूर्वकालके देखे हुए सपनेको याद करके ऐसा मानने लगे कि “यह वही स्वप्न इस रूपमें सत्य हो रहा है!
tad anusmṛtya te vīrā darśanaṃ pūrvakālikam | idaṃ tad iti manyanta daivenopanipīḍitāḥ ||
ວີຣະຊົນເຫຼົ່ານັ້ນ ຜູ້ຖືກຊະຕາກຳບີບຄັ້ນ ໄດ້ລະລຶກເຖິງນິມິດເກົ່າທີ່ເຄີຍເຫັນ ແລ້ວຄິດວ່າ: «ນີ້ແຫຼະ ຄວາມຝັນນັ້ນ ບັດນີ້ກຳລັງເປັນຈິງ ໃນຮູບນີ້!»
संजय उवाच