Aśvatthāmā’s Stuti of Rudra and Śiva’s Empowerment (सौप्तिकपर्व, अध्याय ७)
महाजगरवक्त्राश्व हंसवक्त्रा: सितप्रभा: । दार्वाघाटमुखाश्नलापि चाषवक्त्राश्न भारत,उनके रूप कुत्ते, सूअर और ऊँटोंके समान थे; मुँह घोड़ों, गीदड़ों और गाय-बैलोंके समान जान पड़ते थे। किन्हींके मुख रीछोंके समान थे तो किन्हींके बिलावोंके समान। कोई बाघोंके समान मुँहवाले थे तो कोई चीतोंके। कितने ही गणोंके मुख कौओं, वानरों, तोतों, बड़े-बड़े अजगरों और हंसोंके समान थे। भारत! कितनोंकी कान्ति भी हंसोंके समान सफेद थी, कितने ही गणोंके मुख कठफोरवा पक्षी और नीलकण्ठके समान थे
mahājagaravaktrāśva-haṃsavaktrāḥ sitaprabhāḥ | dārvāghāṭamukhāś caiva cāṣavaktrāś ca bhārata ||
ສັນຈະຍະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພາຣະຕະ, ບາງຕົວມີໜ້າຄ້າຍງູໃຫຍ່, ຄ້າຍມ້າ, ແລະ ຄ້າຍຫົງ; ສ່ອງປະກາຍດ້ວຍແສງຂາວຈາງ. ບາງຕົວມີປາກຄ້າຍນົກດາຣວາຄາດ, ແລະ ບາງຕົວອື່ນຄ້າຍນົກຈາສາ»។
संजय उवाच