अध्याय १ — न्यग्रोधवनोपवेशनम् तथा द्रौणिनिश्चयः
Night at the Banyan and Drauṇi’s Resolve
श्लोका न्यायमवेक्षद्धिस्तत्त्वार्थास्तत््वदर्शिभि: । “इस विषयमें न््यायपर दृष्टि रखनेवाले धर्मचिन्तक एवं तत्त्वदर्शी पुरुषोंने प्राचीन कालमें ऐसे श्लोकोंका गान किया है
«ໃນເລື່ອງນີ້ ບຸລຸດຜູ້ຄິດໄຕ່ທຳ ແລະຜູ້ເຫັນສັດຈະ ຜູ້ມີສາຍຕາແຫ່ງຄວາມຍຸດຕິທຳ ໄດ້ຂັບຮ້ອງຄຳກະວີແຕ່ການກ່ອນ—ຄຳທີ່ປະກາດອັດຖະທີ່ແທ້. ຄຳເຫຼົ່ານັ້ນໄດ້ຍິນກັນວ່າ—»
संजय उवाच