यमसभावर्णनम् (Yamasabhā-varṇanam) — Nārada’s Description of Dharmarāja’s Assembly
अर्कप्रकाशा भ्राजिष्णु: सर्वतः कामरूपिणी । नातिशीता न चात्युष्णा मनसश्च प्रहर्षिणी,उसका प्रकाश सूर्यके समान है। इच्छानुसार रूप धारण करनेवाली वह सभा सब ओरसे प्रकाशित होती है। वह न तो अधिक शीतल है, न अधिक गर्म। मनको अत्यन्त आनन्द देनेवाली है
arkaprakāśā bhrājiṣṇuḥ sarvataḥ kāmarūpiṇī | nātiśītā na cātyuṣṇā manasaś ca praharṣiṇī ||
ນາຣະດະກ່າວວ່າ: «ຫໍປະຊຸມນັ້ນສ່ອງສະຫວ່າງດັ່ງແສງຕາເວັນ. ມັນສາມາດແປງຮູບຕາມປາດຖະໜາ ແລະສະຫວ່າງສະຫງ່າຈາກທຸກດ້ານ. ບໍ່ໜາວເກີນ ແລະບໍ່ຮ້ອນເກີນ; ມັນເຮັດໃຫ້ໃຈຊື່ນບານຢ່າງຍິ່ງ».
नारद उवाच