अकामानां च सर्वेषां सुहृदामर्थदर्शिनाम् । अकरोत् पाण्डवाद्दानं धृतराष्ट्र: सुतप्रिय:,भावी अर्थकों देखने और समझनेवाले सुहृद् अपनी अनिच्छा प्रकट करते ही रह गये; किंतु दुर्योधनादि पुत्रोंके प्रेममें आकर धुृतराष्ट्रने पाण्डवोंको बुलानेका आदेश दे ही दिया
ບັນດາມິດສະຫາຍຜູ້ເຫັນໄກເຖິງຜົນປະໂຫຍດໃນອະນາຄົດ ລ້ວນແຕ່ສະແດງຄວາມບໍ່ປາດຖະໜາ; ແຕ່ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ຜູ້ຮັກລູກຢ່າງຫນັກ ກໍຍັງອອກຄຳສັ່ງໃຫ້ເຊີນພັນດະວະມາ.
वैशम्पायन उवाच