वैशम्पायन उवाच तथा तान् दु:ःखितान् दृष्टवा पाण्डवान् धृतराष्ट्रज: । कृष्यमाणां च पाज्चालीं विकर्ण इदमब्रवीत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! पाण्डवोंको दुःखी और पांचालराजकुमारी द्रौोपदीको घसीटी जाती हुई देख धृतराष्ट्रनन्दन विकर्णने यह कहा--
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນພວກປານດະວະຕົກຢູ່ໃນຄວາມໂສກເສົ້າ ແລະເຫັນປາຈາລີ (ດຣາວປະດີ) ຖືກລາກຖອນໄປ ວິກັນ ບຸດແຫ່ງທຣິຕະຣາສຕຣະ ຈຶ່ງເວົ້າຄໍານີ້.
वैशम्पायन उवाच