राज्यं च कृत्स्नं पार्थेभ्यो यज्ञार्थ वै निवेदितम् राजन! राजा द्रुपदने चौदह हजार दासियाँ, दस हजार सपत्नीक दास, हाथी जुते हुए छब्बीस रथ तथा अपना सम्पूर्ण राज्य कुन्तीपुत्रोंको यज्ञके लिये समर्पित किया था ।। वासुदेवो<पि वार्ष्णेयो मानं कुर्वबन् किरीटिन:
ແລະອານາຈັກທັງປວງ ຍັດຍະເສນະ ໄດ້ຖວາຍແດ່ພວກປາຣຖະ (ບຸດແຫ່ງກຸນຕີ) ເພື່ອພິທີຍັດຍະ. ແລະ ວາສຸເທວະ ຜູ້ເປັນວາຣສະເນຍະ ກໍໄດ້ຖວາຍກຽດແກ່ ກິຣີຕິນ (ອັຣຊຸນ) ດ້ວຍ.
दुर्योधन उवाच