Nāradasya Rājadharma-praśnāḥ
Nārada’s Examination of Royal Ethics
कच्चिन्न चौरैरलुब्धैर्वा कुमारै: स्त्रीबलेन वा । त्वया वा पीड्यते राष्ट्र कच्चित् तुष्टाः कृषीवला:,चोरों, लोभियों, राजकुमारों या राजकुलकी स्त्रियोंद्वारा अथवा स्वयं तुमसे ही तुम्हारे राष्ट्रको पीड़ा तो नहीं पहुँच रही है? क्या तुम्हारे राज्यके किसान संतुष्ट हैं?
ນາຣະດະ ຖາມວ່າ: «ອານາຈັກຂອງເຈົ້າບໍ່ຖືກບີບຄັ້ນໂດຍໂຈນ, ໂດຍຄົນໂລບ, ໂດຍເຈົ້າຊາຍ, ຫຼື ໂດຍສະຕຣີໃນວົງກະສັດ—ຫຼືແມ່ນໂດຍເຈົ້າເອງ—ດອກບໍ? ແລ້ວຊາວນາໃນແຜ່ນດິນຂອງເຈົ້າ ພໍໃຈດີບໍ?»
नारद उवाच