Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
मातुलो भवत: शूर: पुरुजित् कुन्तिवर्धन: । स ते सन्नतिमानेक: स्नेहत: शत्रुसूदन:,जो भारतभूमिके पश्चिमसे लेकर दक्षिणतकके भागपर शासन करते हैं, आपके मामा वे शत्रुसंहारक शूरवीर कुन्तिभोजकुलवर्द्धक पुरुजित् अकेले ही स्नेहवश आपके प्रति प्रेम और आदरका भाव रखते हैं
«ລຸງຝ່າຍແມ່ຂອງເຈົ້າ ປຸຣຸຊິດ ເປັນວິລະບຸລຸດ ແລະເປັນຜູ້ສົ່ງເສີມກຸນຕິ; ລາວເປັນຜູ້ປາບສັດຕູ. ດ້ວຍຄວາມຮັກໃຄ່ ລາວຜູ້ດຽວນັ້ນ ຈຶ່ງຖືກຕ້ອງອ່ອນນ້ອມ ແລະໃຫ້ກຽດແກ່ເຈົ້າ».
श्रीकृष्ण उवाच