राजसूयविचारः — Deliberation on the Rajasuya and the Summoning of Kṛṣṇa
नारद उवाच यन्मां पृच्छसि राजेन्द्र हरिश्नन्द्रं प्रति प्रभो । तत् ते5हं सम्प्रवक्ष्यामि माहात्म्यं तस्य धीमत:,नारदजीने कहा--शक्तिशाली राजेन्द्र! तुमने जो राजर्षि हरिश्वन्द्रके विषयमें मुझसे पूछा है, उसके उत्तरमें मैं उन बुद्धिमान् नरेशका माहात्म्य बता रहा हूँ, सुनो
ນາຣະດ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຣາຊະເອນທຣະ ຜູ້ມີອຳນາດ! ສິ່ງທີ່ເຈົ້າຖາມຂ້າເກືອບກັບ ຣາຊະຣິສີ ຫະຣິສຈັນທຣະ ນັ້ນ, ບັດນີ້ຂ້າຈະກ່າວໃຫ້ເຈົ້າຟັງເຖິງມະຫາຕະພາບຂອງກະສັດຜູ້ມີປັນຍານັ້ນ—ຈົ່ງຟັງເຖີດ.»
नारद उवाच