अन्योन्यवधमिच्छन्तावन्योन्यजयकाड्क्षिणौ । अन्योन्यमभिधावन्तौ गोष्ठे गोवृषभाविव । प्रभिन्नाविव मातड़्ौ सुसंरब्धाविवाचलौ,वे दोनों पुरुषसिंह रथपर विराजमान और रथियोंमें श्रेष्ठ थे। दोनोंने विशाल धनुष धारण किये थे। दोनों ही बाण, शक्ति और ध्वजसे सम्पन्न थे। दोनों कवचधारी थे और कमरमें तलवार बाँधे हुए थे। उन दोनोंके घोड़े श्वेत रंगके थे। वे दोनों ही शंखसे सुशोभित, उत्तम तरकससे सम्पन्न और देखनेमें सुन्दर थे। दोनोंके ही अंगोंमें लाल चन्दनका अनुलेप लगा हुआ था। दोनों ही साँड्ोंक॒े समान मदमत्त थे। दोनोंके धनुष और ध्वज विद्युत॒के समान कान्तिमान् थे। दोनों ही शस्त्रसमूहोंद्वारा युद्ध करनेमें कुशल थे। दोनों ही चँवर और व्यजनोंसे युक्त तथा श्वेत छत्रसे सुशोभित थे। एकके सारथि श्रीकृष्ण थे तो दूसरेके शल्य। उन दोनों महारथियोंके रूप एक-से ही थे। उनके कंधे सिंहके समान, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और आँखें लाल थीं। दोनोंने सुवर्णकी मालाएँ पहन रखी थीं। दोनों सिंहके समान उन्नत कंधोंसे प्रकाशित होते थे। दोनोंकी छाती चौड़ी थी और दोनों ही महान् बलशाली थे। दोनों एक-दूसरेका वध चाहते और परस्पर विजय पानेकी अभिलाषा रखते थे। गोशालामें लड़नेवाले दो साँड़ोंके समान वे दोनों एक-दूसरेपर धावा करते थे। मद बहानेवाले मदोन्मत्त हाथियोंके समान दोनों ही रोषावेशमें भरे हुए थे। पर्वतके समान अविचल थे। विषधर सर्पोंके शिशुओं-जैसे जान पड़ते थे। यम, काल और अन्तकके समान भयंकर प्रतीत होते थे। इन्द्र और वृत्रासुरके समान वे एक-दूसरेपर कुपित थे। सूर्य और चन्द्रमाके समान अपनी प्रभा बिखेर रहे थे। क्रोधमें भरे हुए दो महान् ग्रहोंके समान प्रलय मचानेके लिये उठ खड़े हुए थे। दोनों ही देवताओंके बालक, देवताओंके समान बली और देवतुल्य रूपवान् थे। दैवेच्छासे भूतलपर उतरे हुए सूर्य और चन्द्रमाके समान शोभा पाते थे। दोनों ही समरांगणमें बलवान् और अभिमानी थे। युद्धके लिये नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र धारण किये हुए थे। प्रजानाथ! आमने-सामने खड़े हुए दो सिंहोंके समान उन दोनों नरव्याप्र वीरोंको देखकर आपके सैनिकोंको महान् हर्ष हुआ
anyonyavadham icchantāv anyonyajayakāṅkṣiṇau | anyonyam abhidhāvantau goṣṭhe govṛṣabhāv iva || prabhinnāv iva mātaṅgau susaṃrabdhāv ivācalau ||
ສັນຊະຍະກ່າວວ່າ: «ປາຖະໜາຈະຂ້າກັນ ແລະປາຖະໜາໄຊຊະນະເຫນືອກັນ ທັງສອງພຸ່ງເຂົ້າຫາກັນຢ່າງຕົງ—ດຸດງົວຜູ້ສອງຕົວປະທະກັນໃນຄອກງົວ. ດຸດຊ້າງທີ່ເມົາມົນໃນລະດູມັດ ແລະຫຼຸດພົ້ນອອກມາ ພວກເຂົາຖືກຄວາມໂກດກ້າຄອບງຳ; ແລະດຸດພູເຂົາ ພວກເຂົາຢືນຢູ່ບໍ່ຫວັ່ນໄຫວ.»
संजय उवाच
The verse highlights how the desire to win and the desire to kill can fuse into a single, overpowering impulse. By comparing the warriors to rutting elephants and fighting bulls, it warns that unchecked wrath and pride can make even great heroes resemble forces of nature—powerful, but morally perilous and destructive.
Sañjaya describes two opposing champions rushing at each other with mutual intent to kill and to secure victory. The narration intensifies the scene through layered similes—bulls in a cattle-pen, rut-maddened elephants, and immovable mountains—signaling an imminent, catastrophic clash.