कर्णेन सैन्यस्थापनं तथा नानायुद्धसमवायः
Karna Reforms the Host and Multiple Duels Converge
व्रात्यानां दासमीयानां कृते5प्यशुभकर्मणाम् । ब्रह्मणा निन्दिते धर्मे स त्वं लोके किमब्रवी:,संस्कारहीन, जारज और पापकर्मी पंचनदवासियोंके धर्मकी जब ब्रह्माजीने सत्ययुगमें भी निन्दा की, तब तुम उसी देशके निवासी होकर जगत्मे क्यों धर्मोपदेश करने चले हो?
«ທຳມະທີ່ພຣະພຣະຫມາໄດ້ຕຳນິນັ້ນ—ທຳມະຂອງພວກວຣາຕະຍະ ແລະພວກດາສະມີຍະ, ຂອງຜູ້ບໍ່ມີພິທີສັງສະການ, ຜູ້ເກີດນອກສາຍ, ແລະຜູ້ກະທຳກຳອັນອັບມົນ—ນັ້ນແຫຼະ. ແຕ່ເຈົ້າເປັນຄົນໃນໂລກນີ້ ຈະໄປກ່າວສອນທຳມະເພາະຫຍັງ?»
कर्ण उवाच