तालशब्दांश्व विविधाज्शूराणां चाभिगर्जताम् | श्र॒त्वा तत्र भृशं त्रेसु: पेतुर्मम्लुश्न सैनिका:,सामने गर्जना करनेवाले शूरवीरोंके ताल ठोंकनेके विविध शब्द सुनकर कितने ही सैनिक वहाँ भयसे थर्रा उठते थे, कितने ही गिर पड़ते थे और कितने ही ग्लानिसे भर जाते थे
ເມື່ອໄດ້ຍິນສຽງຕົບມືແລະສຽງຫຼາກຫຼາຍຂອງວີລະຊົນທີ່ຮ້ອງຄຳຮາມຢູ່ຕໍ່ໜ້າ, ທະຫານຫຼາຍຄົນໃນທີ່ນັ້ນກໍສັ່ນສະທ້ານດ້ວຍຄວາມຢ້ານ; ບາງຄົນລົ້ມລົງ, ບາງຄົນກໍເສົ້າຫມອງແລະອ່ອນແຮງໃຈ.
संजय उवाच