Bhagadatta’s Advance, the Saṃśaptaka Challenge, and Arjuna’s Counterstrike (द्रोणपर्व, अध्याय २६)
तस्य नागं मणिमयं रत्नचित्रध्वजे स्थितम् । भल्ल्लाभ्यां कार्मुकं चैव क्षिप्रं चिच्छेद पाण्डव:,राजन्! उसके रत्ननिर्मित विचित्र ध्वजके ऊपर मणिमय नाग विराजमान था। उसे पाण्डुनन्दन भीमने शीघ्र ही दो भल्लोंसे काट गिराया और उसके धनुषके भी टुकड़े-टुकड़े कर दिये
ສັນຊະຍາກ່າວວ່າ: ຂ້າແຕ່ພະຣາຊາ! ເທິງທຸງທີ່ປະດັບດ້ວຍອັນມະນີອັນວິຈິດຂອງລາວ ມີນາກທຳດ້ວຍແກ້ວມະນີຕັ້ງຢູ່. ພີມະ ບຸດແຫ່ງປານດຸ ໄດ້ຕັດມັນລົງຢ່າງວ່ອງໄວດ້ວຍລູກສອນພະລະລະສອງດອກ ແລະຍັງຕັດຄັນທະນູຂອງລາວໃຫ້ແຕກເປັນຊິ້ນໆອີກດ້ວຍ.
संजय उवाच