महत् पूर्व स्थितो यच्च प्राणोत्पत्तिस्थितश्न यत् । स्थितलिडज्ञश्न यन्नित्यं तस्मात् स्थाणुरिति स्मृत:,वे पूर्वकालसे ही महान् रूपमें स्थित हैं, प्राणोंकी उत्पत्ति और स्थितिके कारण हैं तथा उनका लिंगमय शरीर सदा स्थिर रहता है; इसलिये उन्हें 'स्थाणु' कहते हैं
ວະຍາສະ ກ່າວວ່າ: ພຣະອົງດຳລົງຢູ່ແຕ່ກ່ອນການກໍ່ກຳເນີດ ໃນຄວາມຍິ່ງໃຫຍ່; ເປັນເຫດໃຫ້ເກີດ ແລະໃຫ້ດຳລົງຢູ່ແກ່ລົມຫາຍໃຈແຫ່ງຊີວິດທັງປວງ; ແລະກາຍອັນເປັນລິງຄະຂອງພຣະອົງ ກໍຕັ້ງຢູ່ຢ່າງໝັ້ນຄົງຕະຫຼອດການ. ດັ່ງນັ້ນພຣະອົງຈຶ່ງຖືກຈື່ຈຳວ່າ «ສະຖານຸ»—ຜູ້ຕັ້ງຢູ່ບໍ່ຫວັ່ນໄຫວ.
व्यास उवाच