दुर्योधन–द्रोणसंवादः
Arjuna-vīrya-prasaṃśā and renewed battle formation
जयं ते प्रतिदास्थामि वासवस्थेव पावकि: । प्रियं तव मया कार्यमिति जीवामि पार्थिव,जैसे अग्निकुमार कार्तिकेयने तारकासुरका विनाश करके इन्द्रको विजय दिलायी थी, उसी प्रकार मैं आज तुम्हें विजय प्रदान करूँगा। भूपाल! मुझे तुम्हारा प्रिय करना है, इसीलिये जीवन धारण करता हूँ
ກັນນະກ່າວວ່າ: “ເຫມືອນກັບກຸມານແຫ່ງໄຟ ກາຣຕິເກຍ ໄດ້ທໍາລາຍຕາຣະກາສຸຣະ ແລະ ມອບໄຊຊະນະໃຫ້ວາສະວະ (ພຣະອິນ), ຂ້າກໍຈະມອບໄຊຊະນະໃຫ້ທ່ານໃນມື້ນີ້. ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຂ້າດໍາລົງຊີວິດເພື່ອເຮັດສິ່ງທີ່ທ່ານພໍໃຈ.”
कर्ण उवाच