भीमसेन-दुर्योधन-प्रहारः तथा घटोत्कचमायाप्रादुर्भावः | Bhīmasena–Duryodhana Clash and the Manifestation of Ghaṭotkaca’s Māyā
इस प्रकार श्रीमह्याभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वरमें सातवें दिनके युद्धका विरामविषयक छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ८६ ॥। [दाक्षिणात्य अधिक पाठका १६ “लोक मिलाकर कुल ५८ ह “लोक हैं।] नील + ()) क्जअस+- - गुल्मका अर्थ है--प्रधान पुरुषोंसे युक्त रक्षकदल, जिसमें ९ हाथी, ९ रथ, २७ घुड़सवार और ४५ पैदल सैनिक होते हैं। सप्ताशीतितमोब ध्याय: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध संजय उवाच परिणाम्य निशां तां तु सुखं प्राप्ता जनेश्वरा: । कुरव: पाण्डवाश्वैव पुनर्युद्धाय निर्ययु:,संजय कहते हैं--राजन! नरेश्वर कौरव और पाण्डव निद्रासुखका अनुभव करके वह रात बिताकर पुनः युद्धके लिये निकले
sañjaya uvāca | pariṇāmya niśāṃ tāṃ tu sukhaṃ prāptā janeśvarāḥ | kuravaḥ pāṇḍavāś caiva punar yuddhāya niryayuḥ ||
ສັນຊະຍະກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະມະຫາຣາຊາ, ເມື່ອຜ່ານຄືນນັ້ນໄປ ແລະໄດ້ຊື່ນຊົມຄວາມສຸກແຫ່ງການພັກຜ່ອນແລ້ວ, ບັນດາກຸຣຸ ແລະ ປານດະວະ ຜູ້ເປັນເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ ກໍອອກເດີນທາງໄປສູ່ສົງຄາມອີກຄັ້ງ. ການພັກດ້ວຍການນອນບໍ່ໄດ້ລົບລ້າງນ້ໍາໜັກທາງທັມມະຂອງສົງຄາມ; ມັນພຽງແຕ່ຟື້ນຟູຄວາມຕັ້ງໃຈໃຫ້ທັງສອງຝ່າຍກັບຄືນສູ່ທົ່ງຮົບ ດ້ວຍໜ້າທີ່, ຄວາມຄັດແຂ່ງ, ແລະຜົນຕາມມາຈາກການເລືອກຂອງຕົນ.
संजय उवाच