अध्याय ८८ — घटोत्कच-दुर्योधनयुद्धवर्णनम्
Ghaṭotkaca–Duryodhana Engagement
त्वया च नैनां सफलां करोषि देवव्रतं यन्न निहंसि युद्धे । मिथ्याप्रतिज्ञो भव मात्र वीर रक्ष स्वधर्म स्वकुलं यशश्नल,“वीर! तुमने अपने पिताके सामने प्रतिज्ञापूर्वक मुझसे यह कहा था कि “मैं महान् व्रतधारी भीष्मको निर्मल सूर्यके समान तेजस्वी बाणसमूहोंद्वारा अवश्य मार डालूँगा, यह बात मैं सत्य कहता हूँ।' ऐसी प्रतिज्ञा तुमने की थी; परंतु तुम इस प्रतिज्ञाको सफल नहीं करते हो। कारण कि युद्धमें देवव्रत भीष्मका वध नहीं कर रहे हो। झूठी प्रतिज्ञा करनेवाला न बनो। अपने धर्म, कुल और यशकी रक्षा करो
tvayā ca naināṁ saphalāṁ karoṣi devavrataṁ yan na nihansi yuddhe | mithyā-pratijño bhava mātra vīra rakṣa svadharma svakulaṁ yaśaś ca ||
«ແຕ່ເຈົ້າບໍ່ເຮັດໃຫ້ຄໍາສັດນັ້ນສໍາເລັດ, ເພາະເຈົ້າບໍ່ໄດ້ປະຫານ ເທວະວຣະຕະ (ພີດສະມະ) ໃນສົງຄາມ. ໂອ ວີຣະບຸລຸດ, ຢ່າໃຫ້ເຈົ້າເປັນຜູ້ມີຄໍາສັດອັນເທັດ; ຈົ່ງຮັກສາທຳມະຂອງເຈົ້າ, ວົງຕະກູນ ແລະ ກຽດສັກສີ»។
संजय उवाच