Adhyāya 74 (Book 6, Bhīṣma-parva): Bhīma–Duryodhana re-engagement and afternoon escalation
भीष्ममेवा भ्यलीयन्त सह सर्वैस्तवात्मजै: | तेषामार्तायनमभूद् भीष्म: शान्तनवो रणे,उस समय हमलोग उनके अस्त्रोंसे इतने मोहित हो गये थे कि हमें पूर्व और पश्चिमका भी पता नहीं चलता था। भरतश्रेष्ठ] आपके सभी योद्धा घबराकर यह सोचने लगे कि हम किस दिशामें जायँँ। उनके सारे वाहन थक गये थे। कितनोंके घोड़े मार डाले गये थे। उन सबका हार्दिक उत्साह नष्ट हो गया था। वे सब-के-सब एक-दूसरेसे सटकर आपके पुत्रोंके साथ भीष्मजीकी ही शरणमें छिपने लगे। उस युद्धस्थलमें उन्हें केवल शान्तनुनन्दन भीष्म ही आर्त सैनिकोंको शरण देनेवाले प्रतीत हुए
sañjaya uvāca | bhīṣmam evābhyalīyanta saha sarvais tavātmajaiḥ | teṣām ārtāyanam abhūd bhīṣmaḥ śāntanavo raṇe ||
ສັນຊະຍະກ່າວວ່າ: «ແລ້ວພຣະລູກທັງຫມົດຂອງທ່ານ ພ້ອມກອງທັບຂອງພວກເຂົາ ກໍເຂົ້າໄປເບັ້ງຊິດຢູ່ກັບພີສະມະພຽງຜູ້ດຽວ. ໃນສະໜາມຮົບນັ້ນ ພີສະມະ ບຸດແຫ່ງສັນຕະນຸ ກາຍເປັນທີ່ພຶ່ງພາ ແລະບ່ອນປອດໄພຂອງນັກຮົບຜູ້ທຸກທ້ອນ».
संजय उवाच