गौरुडव्यूह-रचना तथा अर्धचन्द्र-प्रत्यव्यूह
Garuḍa Array and the Ardhacandra Counter-Formation
भीष्म: शान्तनव: कि वा तन्ममाचक्ष्व पृच्छत: । धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! इस प्रकार महान् धनुर्धर श्वेतके शल्यके रथके समीप पहुँचनेपर कौरवों तथा पाण्डवोंने क्या किया? अथवा शान्तनुनन्दन भीष्मने कौन-सा पुरुषार्थ किया? मेरे पूछनेके अनुसार ये सब बातें मुझसे कहो || १ है ।। संजय उवाच राजन् शतसहस््राणि ततः: क्षत्रियपुड्वा:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
sañjaya uvāca | rājan śatasahasrāṇi tataḥ kṣatriyapuṅgavāḥ, jighāṃsantaṃ yudhāṃ śreṣṭha tadā āsīt tumulaṃ mahat |
ສັນຈະຍະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າແຕ່ພະຣາຊາ, ໃນຂະນະນັ້ນ ນັກຮົບກະສັດຕະຣິຍະຜູ້ເລີດລ້ຳນັບແສນ ໄດ້ພາກັນພຸ້ນອອກໄປຂ້າງໜ້າ. ດ້ວຍໃຈມຸ່ງຈະສັງຫານນັກຮົບຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ, ສົງຄາມໃນຂະນະນັ້ນຈຶ່ງກວ້າງໃຫຍ່ ແລະ ອື້ອອຶງປັ່ນປ່ວນ—ເພາະທັງກົດຂອງນັກຮົບທີ່ຕ້ອງປົກປ້ອງພວກພ້ອມ ແລະ ຕ້ອງທຳລາຍພະລັງອັນນ່າຢ້ານທີ່ສຸດໃນສະໜາມ. »
संजय उवाच