उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
एवं ब्रुवति विप्रेन्द्रे धृतराष्ट्रीडम्बिकासुतः । आक्षिप्य वाक्यं॑ वाक्यज्ञो वाक््यं चैवाब्रवीत् पुन:,विप्रवर व्यासजी जब इस प्रकार उपदेश दे रहे थे, उसी समय बोलनेमें चतुर अम्बिकानन्दन धृतराष्ट्रने बीचमें ही उनकी बात काटकर उनसे इस प्रकार कहा
ເມື່ອພຣະວິປຣະອິນທຣະ (ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ) ກຳລັງກ່າວຢູ່ດັ່ງນັ້ນ, ທ້າວທຣິຕະຣາດ ບຸດແຫ່ງອຳບິກາ ຜູ້ຊ່ຽວຊານໃນຖ້ອຍຄຳ, ໄດ້ຂັດຂວາງຄຳກ່າວ ແລະເວົ້າຂຶ້ນອີກຄັ້ງດັ່ງນີ້.
वैशम्पायन उवाच