अगस्त्यो यजमानो5सौ ददात्यन्नं विमत्सर: । न च वर्षति पर्जन्य: कथमन्न॑ भविष्यति,“महर्षियो! सुप्रसिद्ध अगस्त्य मुनि हमारे यजमान हैं। वे ईर्ष्यारहित हो श्रद्धापूर्वक सबको अन्न देते हैं। परंतु इधर मेघ जलकी वर्षा नहीं कर रहा है। तब भविष्यमें अन्न कैसे पैदा होगा?
«ອະກັດສະຕະ ມຸນີຜູ້ໂດ່ງດັງນີ້ ເປັນຍະຊະມານ (ເຈົ້າພິທີ) ຂອງພວກເຮົາ. ທ່ານບໍ່ມີຄວາມອິດສາ ແລະແຈກອາຫານໃຫ້ທຸກຄົນດ້ວຍສັດທາ. ແຕ່ບັດນີ້ ເມກຝົນບໍ່ຍອມຕົກ. ແລ້ວໃນພາຍໜ້າ ອາຫານຈະເກີດຂຶ້ນໄດ້ແນວໃດ?»
वैशम्पायन उवाच