अर्जुन–उलूपीसंवादः
Arjuna and Ulūpī: Explanation of Śānti and the Maṇipūra Resolution
भ्रात्रा ज्येष्देन नृपते तवापि विदितं ध्रुवम् । प्रहरस्व यथाशक्ति न मन्युर्विद्यते मम,उसके ऐसा कहनेपर पाण्घुपुत्र अर्जुनने उसे हँसते हुए-से इस प्रकार उत्तर दिया --नरेश्वर! मेरे बड़े भाईने मेरे लिये इस व्रतकी दीक्षा दिलायी है कि जो मेरे मार्गमें विघ्न डालनेको उद्यत हो, उसे रोको। निश्चय ही यह बात तुम्हें भी विदित है। अतः तुम अपनी शक्तिके अनुसार मुझपर प्रहार करो। मेरे मनमें तुमपर कोई रोष नहीं है”
bhrātrā jyeṣṭhena nṛpate tavāpi viditaṃ dhruvam | praharasva yathāśakti na manyur vidyate mama ||
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ເລື່ອງນີ້ທ່ານກໍຮູ້ແນ່ນອນເຊັ່ນກັນ: ພີ່ໃຫຍ່ຂອງຂ້າໄດ້ຜູກມັດຂ້າໄວ້ດ້ວຍວຣະຕະ. ດັ່ງນັ້ນ ຈົ່ງຟັນຂ້າຕາມກຳລັງຂອງທ່ານ. ໃນຂ້າບໍ່ມີຄວາມໂກດ»
वैशम्पायन उवाच