Brahmopadeśa: Ahiṃsā, Jñāna, and the Kṣetrajña–Sattva Analysis
Chapter 49
अनित्यं नित्यमित्येके नास्त्यस्तीत्यपि चापरे | एकरूपं द्विधेत्येके व्यामिश्रमिति चापरे,कोई कहते हैं कि धर्म अनित्य है और कोई उसे नित्य कहते हैं। दूसरे कहते हैं कि धर्म नामकी कोई वस्तु है ही नहीं। कोई कहते हैं कि अवश्य है। कोई कहते हैं कि एक ही धर्म दो प्रकारका है तथा कुछ लोग कहते हैं कि धर्म मिश्रित है
anityaṁ nityam ity eke nāsty astīty api cāpare | ekarūpaṁ dvidhety eke vyāmiśram iti cāpare ||
ວາຍຸກ່າວວ່າ: «ບາງຄົນກ່າວວ່າ ທັມບໍ່ຖາວອນ, ແຕ່ອີກພວກໜຶ່ງກໍກ່າວວ່າ ທັມເປັນນິລັນດອນ. ບາງຄົນປະຕິເສດວ່າ ບໍ່ມີສິ່ງໃດຊື່ວ່າ ‘ທັມ’ ເລີຍ, ແຕ່ອີກພວກໜຶ່ງກໍຢືນຢັນວ່າ ມີຢູ່ແທ້. ບາງຄົນວ່າ ທັມເປັນອັນດຽວໃນແກ່ນແທ້ ແຕ່ປາກົດເປັນສອງຮູບ, ແລະບາງຄົນກໍວ່າ ທັມເປັນສິ່ງປົນປົວສະຫຼັບຊັບຊ້ອນ»។
वायुदेव उवाच