Brahmopadeśa: Ahiṃsā, Jñāna, and the Kṣetrajña–Sattva Analysis
Chapter 49
सद्धावनिरताश्चान्ये केचित् संशयिते स्थिता: । दुःखादन्ये सुखादन्ये ध्यानमित्यपरे जना:,अन्य कितने ही सद्धावमें रुचि रखते हैं। कितने ही लोग संशयमें पड़े रहते हैं। कितने ही साधक कष्ट सहन करते हुए ध्यान करते हैं और दूसरे कई सुखपूर्वक ध्यान करते हैं
saddhāvaniratāścānye kecit saṁśayite sthitāḥ | duḥkhādanye sukhādanye dhyānam ityapare janāḥ ||
ວາຍຸກ່າວວ່າ: “ຄົນບາງພວກອຸທິດຕົນໃນສັດທາ ແລະຄວາມພາກພຽນ; ບາງຄົນກໍຕິດຢູ່ໃນຄວາມສົງໄສ. ບາງຄົນຝຶກສະມາທິທັງທົນທຸກລຳບາກ, ແຕ່ຄົນອື່ນຝຶກສະມາທິຢ່າງສະບາຍ—ດັ່ງນັ້ນແຫຼະ ຜູ້ຄົນຈຶ່ງດຳເນີນການພິຈາລະນາຕ່າງວິທີ.”
वायुदेव उवाच