Brahmā’s Enumeration of Primacies (Ādi) and the Supremacy of Knowledge
Jñāna
तस्माउज्ञानेन शुद्धेन प्रशान्तात्मा जितेन्द्रिय: । निर्ममो निरहंकारो मुच्यते सर्वपाप्मभि:,इसलिये विशुद्ध ज्ञानके द्वारा जिसका चित्त शान्त हो गया है, जिसकी इन्द्रियाँ वशमें हो चुकी हैं तथा जो ममता और अहंकारसे रहित हो गया है, वह सब पापोंसे मुक्त हो जाता है
ດັ່ງນັ້ນ ດ້ວຍຄວາມຮູ້ອັນບໍລິສຸດ ຜູ້ທີ່ຈິດໃຈສົງບົບ, ຊະນະເຫນືອອິນຊີ, ບໍ່ຍຶດຕິດ ແລະບໍ່ມີອະຫັງການ—ຜູ້ນັ້ນຍ່ອມພົ້ນຈາກບາບທັງປວງ.
वायुदेव उवाच