ययातेर्वानप्रस्थतपःस्वर्गारोहणम् | Yayāti’s Vānaprastha Austerities and Ascent to Heaven
ययातिरुवाच क्रुद्धादाशीविषात् सर्पाज्ज्वलनात् सर्वतोमुखात् । दुराधर्षतरो विप्रो ज्ञेयः पुंसा विजानता,ययाति बोले--देवि! विज्ञ पुरुषको चाहिये कि वह ब्राह्मणको क्रोधमें भरे हुए विषधर सर्प तथा सब ओरसे प्रज्वलित अग्निसे भी अधिक दुर्धर्ष एवं भयंकर समझे
ຍະຍາຕິ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ເທວີ, ຜູ້ຊາຍຜູ້ຮູ້ເທົ່າທັນ ຄວນຮູ້ວ່າ ພຣາຫມັນຜູ້ໂກດນັ້ນ ຍາກຈະຕ້ານທານຍິ່ງກວ່າງູພິດທີ່ກຳລັງເກຣີຍດ ແລະຍິ່ງກວ່າໄຟທີ່ລຸກໂຊນຈາກທຸກທິດ».
वैशम्पायन उवाच