नलस्य विवस्त्रीकरणं दमयन्ती-सहानुगमनं च
Nala’s Disrobing and Damayantī’s Companionship
कलियुगके ऐसा कहनेपर देवताओंने उत्तर दिया--'दमयन्तीने हमारी आज्ञा लेकर नलका वरण किया है ।। का च सर्वगुणोपेतं नाश्रयेत नल॑ नृपम् यो वेद धर्मानखिलान् यथावच्चरितव्रत:,“राजा नल सर्वगुणसम्पन्न हैं। कौन स्त्री उनका वरण नहीं करेगी? जिन्होंने भलीभाँति ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करके चारों वेदों तथा पंचम वेद समस्त इतिहास-पुराणका भी अध्ययन किया है, जो सब धर्मोंको जानते हैं, जिनके घरपर पंचयज्ञोंमें धर्मके अनुसार सम्पूर्ण देवता नित्य तृप्त होते हैं, जो अहिंसा-परायण, सत्यवादी तथा दृढ़तापूर्वक व्रतका पालन करनेवाले हैं, जिन नरश्रेष्ठ लोकपाल-सदृश तेजस्वी नलमें दक्षता, धैर्य, ज्ञान, तप, शौच, शम और दम आदि गुण नित्य निवास करते हैं। कले! ऐसे राजा नलको जो मूढ़ शाप देनेकी इच्छा रखता है, वह मानो अपनेको ही शाप देता है। अपने द्वारा अपना ही विनाश करता है
bṛhadaśva uvāca — kaliyugake evaṃ kahne para devatābhir uttaraṃ dattam— “damayantyā asmākam ājñāṃ gṛhītvā nalaḥ varaṇīto ’sti. kaś ca sarvaguṇopetaṃ nāśrayeta nalaṃ nṛpam? yo veda dharmān akhilān yathāvac caritavrataḥ.”
ಬೃಹದಶ್ವನು ಹೇಳಿದರು: ಕಲಿ ಹೀಗೆ ಹೇಳಿದಾಗ ದೇವತೆಗಳು ಉತ್ತರಿಸಿದರು—“ನಮ್ಮ ಅನುಮತಿ ಪಡೆದು ದಮಯಂತಿ ರಾಜ ನಲನನ್ನು ವರಿಸಿಕೊಂಡಳು. ಸರ್ವಗುಣಸಂಪನ್ನನಾದ ನಲ ನೃಪನ ಆಶ್ರಯವನ್ನು ಯಾರು ಪಡೆಯದೆ ಇರಬಹುದು? ಅವನು ಸಮಸ್ತ ಧರ್ಮಗಳನ್ನು ಯಥಾವತ್ತಾಗಿ ತಿಳಿದವನು; ವ್ರತಾಚರಣೆಯಲ್ಲಿ ಶುದ್ಧನಿಷ್ಠನು.”
बु॒हदश्व उवाच