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Shloka 15

कुन्तीगर्भगोपनम् तथा मञ्जूषाप्रवाहः

Kuntī’s concealed childbirth and the river-borne casket

स्यन्दनेन जहि क्षिप्रं रावणं मा चिरं कृथा: । मातलि बोला--पुरुषसिंह श्रीराम! यह हरे रंगके घोड़ोंसे जुता हुआ विजयशाली उत्तम रथ देवराज इन्द्रका है। इस विशाल रथके द्वारा इन्द्रने सैकड़ों दैत्यों और दानवोंका समरांगणमें संहार किया है। नरश्रेष्ठ! मेरे द्वारा संचालित इस रथपर बैठकर आप युद्धमें रावणको शीघ्र मार डालिये, विलम्ब न कीजिये ।। १३-१४ $ ।। इत्युक्तो राघवस्तथ्यं वचो5शड्कत मातले:,मातलिके ऐसा कहनेपर श्रीरामचन्द्रजीने उसकी बातपर इसलिये संदेह किया कि कहीं यह भी राक्षसकी माया ही न हो। तब विभीषणने उनसे कहा--'पुरुषसिंह! यह दुरात्मा रावणकी माया नहीं है

syandanena jahi kṣipraṁ rāvaṇaṁ mā ciraṁ kṛthāḥ |

ಮಾರ್ಕಂಡೇಯನು ಹೇಳಿದನು—“ಈ ರಥವನ್ನು ಏರಿ ರಾವಣನನ್ನು ಶೀಘ್ರವಾಗಿ ಸಂಹರಿಸು; ವಿಳಂಬ ಮಾಡಬೇಡ।”

स्यन्दनेनby/with the chariot
स्यन्दनेन:
Karana
TypeNoun
Rootस्यन्दन
FormMasculine, Instrumental, Singular
जहिslay
जहि:
Karma
TypeVerb
Rootहन्
FormImperative, Second, Singular
क्षिप्रम्quickly
क्षिप्रम्:
TypeIndeclinable
Rootक्षिप्र
रावणम्Ravana
रावणम्:
Karma
TypeNoun
Rootरावण
FormMasculine, Accusative, Singular
माdo not
मा:
TypeIndeclinable
Rootमा
चिरम्for long / long time
चिरम्:
TypeIndeclinable
Rootचिर
कृथाःdo / make
कृथाः:
TypeVerb
Rootकृ
FormImperative, Second, Singular, Parasmaipada

मार्कण्डेय उवाच

M
Mārkaṇḍeya
R
Rāvaṇa
S
syandana (chariot)