Vyādha–Brāhmaṇa Saṃvāda: Śāpa, Vṛtta-Dharma, and Counsel Against Viṣāda
Grief
मान्या हि गुरव: सर्वे एकपत्न्यस्तथा स्त्रिय: । पतिव्रतानां शश्रूषा दुष्करा प्रतिभाति मे,“समस्त गुरुजन और पतिव्रता नारियाँ भी समादरके योग्य हैं। पतिव्रता स्त्रियाँ अपने पतिकी जैसी सेवा-शुश्रूषा करती हैं; वह दूसरे किसीके लिये मुझे अत्यन्त कठिन प्रतीत होती है
ಎಲ್ಲ ಗುರುಜನರೂ, ಏಕಪತ್ನೀವ್ರತಸ್ಥರೂ, ಹಾಗೆಯೇ ಸ್ತ್ರೀಯರೂ—ಎಲ್ಲರೂ ಪೂಜ್ಯರು. ಪತಿವ್ರತೆಯರ ಸೇವಾ-ಶುಶ್ರೂಷೆ ನನಗೆ ಅತ್ಯಂತ ದುಷ್ಕರವಾಗಿ ತೋರುತ್ತದೆ.
वैशम्पायन उवाच