कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
उपविष्टं महाराज पद्मेन्दुसद्शाननम् | फुल्लपद्मविशालाक्षं बालं पश्यामि भारत,नराधिप! उस वृक्षकी चौड़ी शाखापर एक पलंग था, जिसके ऊपर दिव्य बिछौने बिछे हुए थे। महाराज! उस पलंगपर एक सुन्दर बालक बैठा दिखायी दिया, जिसका मुख कमलके समान कमनीय शोभा धारण करनेवाला तथा चन्द्रमाके समान नेत्रोंको आनन्द देनेवाला था। उसके नेत्र प्रफुल्ल पद्मदलके समान विशाल थे
upaviṣṭaṃ mahārāja padmendusadṛśānanam | phullapadmaviśālākṣaṃ bālaṃ paśyāmi bhārata ||
ಓ ಮಹಾರಾಜ, ಓ ಭಾರತ! ಅಲ್ಲಿ ನಾನು ಒಂದು ಬಾಲಕನು ಕುಳಿತಿರುವುದನ್ನು ಕಂಡೆನು—ಅವನ ಮುಖವು ಪದ್ಮವೂ ಚಂದ್ರನೂ ಹೋಲುವಂತೆ ಮನೋಹರ; ಅವನ ಕಣ್ಣುಗಳು ಅರಳಿದ ಪದ್ಮದಳಗಳಂತೆ ವಿಶಾಲವಾಗಿದ್ದವು।
वैशम्पायन उवाच