कण्वोपदेशः—नश्वरबलविवेकः तथा मातलिगुणकेश्याः आख्यानारम्भः
Kaṇva’s Counsel on Impermanent Power; Opening of the Mātali–Guṇakeśī Narrative
उन्मत्ताश्न विचेष्टन्ते नष्टसंज्ञा विचेतस:,इन अस्त्रोंके प्रयोगसे कुछ लोग उन्मत्त हो जाते हैं और वैसी ही चेष्टाएँ करने लगते हैं। कितनोंको सुध-बुध नहीं रह जाती, वे अचेत हो जाते हैं। कई मनुष्य सोने लगते हैं। कुछ उछलते-कूदते और छींकते हैं। कितने ही मल-मूत्र करने लग जाते हैं और कुछ लोग निरंतर रोते-हँसते रहते हैं
unmattāś ca viceṣṭante naṣṭasaṃjñā vicetasaḥ
ಈ ಅಸ್ತ್ರಗಳ ಪರಿಣಾಮದಿಂದ ಕೆಲವರು ಉನ್ಮತ್ತರಾಗಿ ಹುಚ್ಚರಂತೆ ವರ್ತಿಸುತ್ತಾರೆ; ಇನ್ನೂ ಕೆಲವರಲ್ಲಿ ಜ್ಞಾನ-ಸ್ಮೃತಿ ನಾಶವಾಗಿ ಅವರು ಅಚೇತನರಾಗುತ್ತಾರೆ।
राम उवाच