धृतराष्ट्र-संजय संवादः — उपप्लव्यगमनाज्ञा
Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Dialogue: Command to Proceed to Upaplavya
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ४१ “लोक हैं।] नी ्रा पल हज निया धाइसिा त्रयोविशो<् ध्याय: संजयका युधिष्ठिससे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना वैशम्पायन उवाच राज्ञस्तु वचन श्रुत्वा धृतराष्ट्रस्य संजय: । उपप्लव्यं ययौ द्रष्टं पाण्डवानमितौजस:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! राजा धृतराष्ट्रकी बात सुनकर संजय अमित तेजस्वी पाण्डवोंसे मिलनेके लिये उपप्लव्य गया
vaiśampāyana uvāca | rājñas tu vacanaṃ śrutvā dhṛtarāṣṭrasya sañjayaḥ | upaplavyaṃ yayau draṣṭuṃ pāṇḍavān amitaujasaḥ ||
ವೈಶಂಪಾಯನನು ಹೇಳಿದನು— ರಾಜ ಧೃತರಾಷ್ಟ್ರನ ವಚನವನ್ನು ಕೇಳಿ ಸಂಜಯನು, ಅಪಾರ ತೇಜಸ್ಸಿನ ಪಾಂಡವರನ್ನು ನೋಡಲು ಉಪಪ್ಲವ್ಯಕ್ಕೆ ಹೊರಟನು.
वैशम्पायन उवाच