Nārāyaṇasya Guhya-nāmāni Niruktāni (Etymologies of Nārāyaṇa’s Secret Epithets) / नारायणस्य गुह्यनामानि निरुक्तानि
यह शरीर पंचभूतोंका घर है। इसमें हड्डियोंके खंभे लगे हैं। यह नस-नाड़ियोंसे बँधा हुआ, रक्त-मांससे लिपा हुआ और चमड़ेसे मढ़ा हुआ है। इसमें मल-मूत्र भरा है, जिससे दुर्गन्ध आती रहती है। यह बुढ़ापा और शोकसे व्याप्त, रोगोंका घर, दुःखरूप, रजोगुणरूपी धूलसे ढका हुआ और अनित्य है; अतः तुम्हें इसकी आसक्तिको त्याग देना चाहिये ।। इदं विश्व जगत् सर्वमजगच्चापि यद् भवेत् | महाभूतात्मकं सर्व महद् यत् परमाश्रयात्
idam viśva-jagat sarvam ajagac cāpi yad bhavet | mahābhūtātmakam sarvaṁ mahad yat paramāśrayāt ||
ನಾರದನು ಹೇಳಿದನು—ಈ ಸಮಸ್ತ ವಿಶ್ವ—ಚರವಾಗಿರುವುದೂ ಅಚರವಾಗಿರುವುದೂ—ಎಲ್ಲವೂ ಮಹಾಭೂತಮಯವಾದ ಮಹತ್ತಾದ ರೂಪ; ಅದು ಪರಮಾಶ್ರಯದಲ್ಲಿ ನೆಲಸಿದೆ.
नारद उवाच