राजधर्मः, दण्डनीतिः, कर्तृत्व-विचारः च
Royal Duty, Lawful Discipline, and the Question of Agency
तथापि लोके कर्माणि समावर्तन्ति भारत । शुभाशुभफल चैते प्राप्तुवन्तीति मे मति:,भारत! नृपश्रेष्ठ) यदि कहो कि यह सब माननेपर भी लोकमें कर्मोंकी आवृत्ति होती ही है--लोग कर्म करते और उनके शुभाशुभ फलोंको पाते ही हैं--ऐसा मेरा मत है; तो इसके उत्तरमें निवेदन है कि इस दशामें भी जिस कर्मके कारण उसके फलरूपसे अशुभकी प्राप्ति होती है, उस पापमूलक कर्मको ही तुम त्याग दो। अपने मनको शोकमें न डुबाओ
tathāpi loke karmāṇi samāvartanti bhārata | śubhāśubhaphalaṃ caite prāptuvantīti me matiḥ ||
ವ್ಯಾಸನು ಹೇಳಿದರು— ಓ ಭಾರತ! ಆದರೂ ಲೋಕದಲ್ಲಿ ಕರ್ಮಗಳು ಪುನಃಪುನಃ ನಡೆಯುತ್ತವೆ; ಮತ್ತು ಜನರು ಅವುಗಳ ಶುಭಾಶುಭ ಫಲಗಳನ್ನು ನಿಶ್ಚಯವಾಗಿ ಪಡೆಯುತ್ತಾರೆ— ಇದು ನನ್ನ ಮತ.
व्यास उवाच