दुर्वारणो दुर्विषहो दुःसहो दुरतिक्रम: । दुर्घर्षो दुष्प्र कम्पश्च दुर्विषो दुर्जयो जय:,आप अधर्मके नाशक, महापार्श्च, चण्डधार, गणाधिप, गोनर्द, गौओंको आपत्तिसे बचानेवाले, नन्न्दीकी सवारी करनेवाले, त्रैलोक्यरक्षक, गोविन्द (श्रीकृष्णरूप), गोमार्ग (इन्द्रियोंके संचालक), अमार्ग (इन्द्रियोंके अगोचर), श्रेष्ठ, स्थिर, स्थाणु, निष्कम्प, कम्प, दुर्वरण (जिनका सामना करना कठिन है, ऐसे), दुर्विषह (असहा वेगवाले), दुःसह, दुर्लडघ्य, दुर्द्धर्ष, दुष्प्र कम्प, दुर्विष, दुर्जय, जय, शश (शीघ्रगामी), शशांक (चन्द्रमा) तथा शमन (यमराज) हैं। सर्दी-गर्मी, क्षुधा, वृद्धावस्था तथा मानसिक चिन्ताको दूर करनेवाले भी आप ही हैं। आप ही आधि-व्याधि तथा उसे दूर करनेवाले हैं
ನೀನು ದುರ್ವಾರಣ, ದುರ್ವಿಷಹ, ದುಃಸಹ, ದುರತಿಕ್ರಮ; ದುರ್ಘರ್ಷ, ದುಷ್ಪ್ರಕಂಪ, ದುರ್ವಿಷ, ದುರ್ಜಯ—ಮತ್ತು ನೀನೇ ಜಯ.
भीष्म उवाच