Śalya Installed as Commander; Coalition Agreement and Battle Arrays (शल्यसेनापत्यारोहणं व्यूहवर्णनं च)
हृष्टा: सुमनसश्वलैव बभूवुस्तत्र सैनिका: । मेनिरे निहतान् पार्थान् मद्रराजवशं गतान्,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” वे सब-के-सब प्रसन्नचित्त होकर हर्षसे भर गये और यह मानने लगे कि कुन्तीके पुत्र मद्रराज शल्यके वशमें पड़कर अवश्य ही मारे जायँगे
hṛṣṭāḥ sumanasaś caiva babhūvus tatra sainikāḥ | menire nihatān pārthān madrarājavaśaṃ gatān iti satyaṃ bravīmy eṣa duryodhana na saṃśayaḥ ||
ಆಗ ಸೈನಿಕರು ಹರ್ಷಿತರಾಗಿ, ಉಲ್ಲಾಸಚಿತ್ತರಾದರು. ಮದ್ರರಾಜ ಶಲ್ಯನ ವಶಕ್ಕೆ ಬಂದ ಕುಂತೀಪುತ್ರರು (ಪಾಂಡವರು) ನಿಶ್ಚಯವಾಗಿ ಹತರಾಗುವರು ಎಂದು ಅವರು ಭಾವಿಸಿದರು. ದುರ್ಯೋಧನ! ಇದನ್ನು ನಾನು ಸತ್ಯವಾಗಿ ಹೇಳುತ್ತೇನೆ—ಸಂಶಯವಿಲ್ಲ.
संजय उवाच