कर्णपर्व — अध्याय ५७
Arjuna’s targeted advance; Śalya–Karṇa dialogue; interception attempts
अयुध्यंस्तावकै: सार्ध मृत्युं कृत्वा निवर्तनम्,वे मृत्युको ही युद्धसे निवृत्त होनेका निमित्त बनाकर आपके योद्धाओंके साथ युद्ध कर रहे थे। तदनन्तर जहाँ वह भारी जनसंहार हो रहा था, उस संग्रामभूमिको देखते हुए भगवान् श्रीकृष्ण सव्यसाची अर्जुनसे इस प्रकार बोले--
ಅವರು ಮರಣವನ್ನೇ ಯುದ್ಧದಿಂದ ಹಿಂತಿರುಗುವ ಕಾರಣವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡು ನಿಮ್ಮ ಯೋಧರೊಂದಿಗೆ ಯುದ್ಧ ಮಾಡುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ.
संजय उवाच