युद्धानामति सर्वेषां युद्धमेतदिति प्रभो । सर्वयुद्धानि चैतस्य कलां नाहन्ति षोडशीम्,प्रभो! महाराज! उस समय वहाँ उड़कर आते हुए सिद्ध परस्पर इस प्रकार कहने लगे --“यह युद्ध तो सभी युद्धोंसे बढ़कर हो रहा है, अन्य सब युद्ध तो इसकी सोलहवीं कलाके भी बराबर नहीं थे
“ಪ್ರಭೋ! ಈ ಯುದ್ಧವು ಎಲ್ಲ ಯುದ್ಧಗಳಿಗಿಂತಲೂ ಅತಿಶಯ; ಇತರ ಎಲ್ಲ ಯುದ್ಧಗಳು ಇದರ ಹದಿನಾರನೇ ಭಾಗಕ್ಕೂ ತಲುಪುವುದಿಲ್ಲ.”
संजय उवाच